
सूरह फ़लक़ (سورة الفلق) कुरआन मजीद की पाँच आयतों वाली मक्की सूरत है और इसे “मुअव्विज़तैन” यानी सूरह फ़लक़ और सूरह नास की जोड़ी में गिना जाता है। इस सूरत में अल्लाह ﷻ से दुआ की जाती है कि हमें अंधेरे में छिपी बुरी ताक़तों, जादू-टोने, नज़र-ए-बद और हसद (ईर्ष्या) से बचा ले। यह छोटी सूरत मोमिनों के लिए हिफ़ाज़त और दिल के सुकून का बड़ा सहारा है। हदीसों में आता है कि नबी ﷺ सुबह और शाम इसे सूरह नास के साथ पढ़ते थे, ताकि हर तरह के शैतानी असर और नुकसान से पनाह मिल सके।
इस ब्लॉग में हम सूरह फ़लक़ का अरबी पाठ, हिंदी अनुवाद और आसान तर्जुमा साझा करेंगे, ताकि हर पाठक इसे समझ सके और अपनी दुआओं का हिस्सा बना सके।
सूरह फ़लक़ अरबी में (Arabic Text)
قُلْ أَعُوذُ بِرَبِّ الْفَلَقِ مِن شَرِّ مَا خَلَقَ وَمِن شَرِّ غَاسِقٍ إِذَا وَقَبَ وَمِن شَرِّ النَّفَّاثَاتِ فِي الْعُقَدِ وَمِن شَرِّ حَاسِدٍ إِذَا حَسَدَ
सूरह फ़लक़ हिंदी अनुवाद (Hindi Translation)
कहो: मैं सुबह के उदय (फ़लक़) के पालनहार की शरण लेता हूँ।
उसकी हर उस मख़लूक़ (संपूर्ण सृष्टि) की बुराई से, जिसे उसने पैदा किया।
उस गहरी रात की बुराई से, जब उसका अंधेरा छा जाता है।
उन जादू करने वाली औरतों की बुराई से, जो गाँठों पर फूँक मारती हैं।
और हर हसद करने वाले की बुराई से, जब वह हसद करता है।
सूरह फ़लक़ तर्जुमा (Transliteration in Roman Hindi/Urdu style)
Qul a‘ūdhu birabbil-falaq
Min sharri mā khalaq
Wa min sharri ghāsiqin idhā waqab
Wa min sharri an-naffāthāti fil-‘uqad
Wa min sharri ḥāsidin idhā ḥasad
सूरह फ़लक़ का महत्व और फ़ज़ीलत (Virtues & Importance)
सूरह फ़लक़ अल्लाह तआला की वह महान सूरह है, जिसे बंदों की हिफ़ाज़त और पनाह माँगने के लिए नाज़िल किया गया। इसे सूरह नास के साथ मिलाकर “मुअव्विज़तैन” कहा जाता है, क्योंकि दोनों मिलकर मोमिन को शैतान, जादू-टोना, नज़र-ए-बद और हर तरह की बुराई से बचाती हैं।
रसूलुल्लाह ﷺ ने फ़रमाया: “जो शख़्स सूरह फ़लक़ और सूरह नास पढ़ता है, अल्लाह तआला उसे तमाम शर्र से महफ़ूज़ कर देता है।” (सहीह मुस्लिम)
रसूलुल्लाह ﷺ हर सुबह और शाम इन दोनों सुराओं की तिलावत करके अपने ऊपर दम करते और सहाबा-ए-किराम को भी यही अमल करने की ताकीद करते। इससे साफ़ होता है कि इन सुराओं का असली मक़सद हिफ़ाज़त, तसल्ल्ली और रूहानी अमन है।
सूरह फ़लक़ कब पढ़ना चाहिए? (When to Recite Surah Falaq)
सूरह फ़लक़ की तिलावत के लिए हदीस में कई ख़ास मौके बताए गए हैं, जहाँ मोमिन अल्लाह की हिफ़ाज़त और रहमत हासिल करता है:
- सुबह और शाम: रसूलुल्लाह ﷺ हर सुबह और शाम सूरह इख़लास, सूरह फ़लक़ और सूरह नास पढ़ते थे, ताकि दिन-रात अल्लाह तआला की पनाह और बरकत बनी रहे।
- सोने से पहले: सोने से पहले रसूलुल्लाह ﷺ इन सुराओं को पढ़कर अपने हाथों पर दम करते और पूरे जिस्म पर फेरते थे, जिससे रात भर रूहानी अमन मिलता था।
- हसद और नज़र-ए-बद से बचाव: जब इंसान को बुरी नज़र, जादू या शैतानी असर का अंदेशा हो, तो सूरह फ़लक़ की तिलावत रूहानी सुरक्षा और सुकून का सबसे आसान ज़रिया है।
इसलिए, सूरह फ़लक़ पढ़ना सुबह-शाम, सोने से पहले और हिफ़ाज़त की ज़रूरत पड़ने पर एक सुन्नत और आज़माया हुआ अमल है।
संबंधित सूरतें और दुआएं (Related Surahs & Duas)
सूरह फ़लक़ उन सुराओं और दुआओं से जुड़ी है जो मोमिन के लिए हिफ़ाज़त, रहमत और रूहानी अमन का सहारा हैं:
- सूरह नास: सूरह फ़लक़ के साथ मिलकर इसे “मुअव्विज़तैन” कहा जाता है। दोनों इंसान को शैतान, नज़र-ए-बद और जादू-टोना जैसी बुराइयों से महफ़ूज़ रखती हैं।
- सूरह इख़लास: सूरह फ़लक़ और सूरह नास के साथ यह सुबह-शाम की अज़्कार का हिस्सा है। रसूलुल्लाह ﷺ ने इसे हिफ़ाज़त और बरकत के लिए पढ़ने की ताकीद की।
- दुआएँ हिफ़ाज़त के लिए: बुरी नज़र, हसद और डर से बचने के लिए रसूलुल्लाह ﷺ से कई मअसूर दुआएँ मروی हैं, जिन्हें रोज़ाना पढ़ना सुन्नत और मुबारक अमल है।
FAQs — सूरह फ़लक़ से जुड़े आम सवाल
Mohammed Basheer is the founder of Sukoonly.com, an Islamic blog focused on duas, prophetic healing, and Qur’anic wisdom. He writes with sincerity and spiritual depth for seekers around the world.
